Chhand Rag
Saturday, 24 March 2018
सुमुखी सवैया
माँ
कहे न कहे पर जानत हे,लइका जब रोवत हे सुन माँ।
कहाँ कब का लइका मँगथे,सब देवत हे बढ़िया चुन माँ।
रहे मन मा सब जानत हे,सपना ल तको कइसे बुन माँ।
कहाँ लइका पर जान सके,बइठे कइसे चुपके गुन माँ।1।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment