Thursday, 2 August 2018

लांवणी छंद

मनखे ला मनखे सब जानव,झन भगवान बनावव जी।
करम करे धरती मा आये,करम करे फल पावव जी।

कतको मनखे बन भगवाने, लूटे बपुरा मनखे ला।
आनी बानी लालच दे के,ले लेथे सब तनखे ला।
धरम करम के पाठ पढ़ा के,डरव्हाथे  सब जानव जी।
मनखे ला मनखे सब मानव,झन भगवान ग मानव जी।

मन मे रख लव सब बिसवासे,संग सदा भगवान रहे।
धन दौलत अउ सोना चाँदी, दे दव कहिके कहाँ कहे।
श्रद्धा के दू फूल चढावव,अउ भगवान ल पावव जी।
पाखंडी मनखे पहिचानव, अब तो दूर भगावव जी।

हम सब ला भूखा ओ मारय,खुद तो माल कमावत हे।
बिना करम के डरा डरा के,लाखो पइसा पावत हे।
सुख दुख आवत जावत रहिथे,झन कोनो घबरावव जी।
मनखे सँग मनखे मिल जावव , दुख ला दूर हटावव जी।

रचना कार -दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार

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