मान कहे जिन बात बड़े मन,काबर तैं इतरावत हावच।
राह बने दिखलाय हवे,अनते तँय काबर जावत हावच ।
तोर करे करनी दुख देवय,कबार लोग सतावत हावच।
जेन बड़े मन गे करके,उखरो तँय राह मिटावत हावच।1।
ओमन जीवन सार बना,रसता सब ला दिखलाइन हावय।
जे मन राह चले उन मा,दुख थोरिक गा कब ओमन पावय।
राह चले जिनगी सँवरे, अउ संग म देश चलावत जावय।
आज सहे दुख जे हम लोगन,ते उँखरो कभु तीर न आवय।2।
नींव बनाय भरे पथरा,घर हा तब हीं बन पावत हावय।
लोग सबो ल भुलाय जथे,कतका भितरी म दबावत हावय।
जे पुरखा मन काम करे,तिन ला अब लोग भुलावत हावय।
बाढ़त हे घर ऊपर मा घर नींव सबो बिसरावत हावय।3।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार
राह बने दिखलाय हवे,अनते तँय काबर जावत हावच ।
तोर करे करनी दुख देवय,कबार लोग सतावत हावच।
जेन बड़े मन गे करके,उखरो तँय राह मिटावत हावच।1।
ओमन जीवन सार बना,रसता सब ला दिखलाइन हावय।
जे मन राह चले उन मा,दुख थोरिक गा कब ओमन पावय।
राह चले जिनगी सँवरे, अउ संग म देश चलावत जावय।
आज सहे दुख जे हम लोगन,ते उँखरो कभु तीर न आवय।2।
नींव बनाय भरे पथरा,घर हा तब हीं बन पावत हावय।
लोग सबो ल भुलाय जथे,कतका भितरी म दबावत हावय।
जे पुरखा मन काम करे,तिन ला अब लोग भुलावत हावय।
बाढ़त हे घर ऊपर मा घर नींव सबो बिसरावत हावय।3।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार
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