Friday, 3 August 2018

त्रिभंगी छंद

सुन ले जग जननी,हमर सुमरनी,हम दुखियन के, दुःख हरो। 
जल्दी तुम आवव, भाग जगावव,पाप हरो माँ, पुन्य भरो। 
जग मा दुख बाढ़े,रकसा ठाढ़े,बन काली,संघार करो। 
कोनो झन रोवय,कुछ झन खोवय, अइसन माता ,भाग भरो।1। 

हम लइका तोरे,हन कर जोरे, मूँड़ नवाँ हम,मांग करें। 
अइसन दे जननी,चिंता हरनी,सब घर सुख के,फूल झरे। 
लइका जब रोवय,माँ खुश होवय,का अइसन गा,हो सकथे। 
हम आज गुहारन,मातु पुकारन,सोर हमर दाई रखथे।2। 

माता सुन बानी,जग कल्याणी,पूजन हम नइ ,जानत हैं। 
अंतस मा भरके,रूप ल धरके,मातु सदा हम ,मानत हैं। 
सब कुछ हे तोरे,कुछ नइ मोरे,का देवँव मैं, मातु बता। 
किरपा अब करदे,दुख ला हर दे,मंद मती हँव, झन ग सता।3। 

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदा बाज़ार

No comments:

Post a Comment