बाल कविता
साइकल सीखत हे सोनू,
सँग मा दउड़त हे मोनू।
कैची फाँक फँसाये हे,
हेंडिल सम्हल न पाये हे।
हॉफ पायडिल मारत हे,
झट ले पाँव उतारत हे।
फिर खट ले चढ़ जावत हे,
अड़बड़ मजा उड़ावत हे।
रेस चलाये बर लागिस,
जाने का मनवा जागिस।
गड्ढा पागे हकरस ले।
सोनू गिर गे भकर ले।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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