हे मनु के सन्तानों सुन लो,अंतस मन क्या कहता है।
ऊपर वाला कहीं रहे ना,ओ अंतस में रहता है।
गलती करने से घबराते,उस पर जरा विचार करो।
क्यों डरता है पहले पहले,पलभर उसमें ध्यान धरो।
हाथ कँपा के मन अकुला के,हमसे ओ कुछ कहता है।
ऊपर वाला कहीं रहे ना,ओ अंतस में रहता है।
मार काट जो तुम करते हो,अपने हीं सग भाई से।
अपना हीं तो खून बहाया,कुछ ना मिले लड़ाई से।
देख तुम्हारी करतूतों को,अंतस रोता रहता है।
हे मनु के सन्तानों सुन लो,अंतस मन क्या कहता है।
लाख मना करता है फिर भी,बात कभी ना तू माने।
अपनी करनी से अंतस को,पीड़ा दे क्यों ना जाने।
करता कोई भरता कोई,सब अंतस हीं सहता है।
ऊपर वाला कहीं रहे ना,ओ अंतस में रहता है।
काँप रहे हो हाथ पैर औ, अंतस भी धिक्कार रहा।
सोंच जरा करने से पहले,अंतस मन क्या अभी कहा।
गलती कर पछताया जो तूँ,आँसू फिर क्यों बहता है।
ऊपर वाला कहीं रहे ना,ओ अंतस में रहता है।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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