समे बड़ा बलवान,रे भाई समे बड़ा बलवान।
नइ जाने ते गुस्सा करथे,जान अरे नादान।
रे भाई समे बड़ा बलवान।
जे सब्जी ठंडा मा आथे,कौड़ी दाम बेंचाथे।
फेंकत रहिथे बारी वाला,दाम कहाँ ओ पाथे।
ओ सब्जी बरसा मा खाबे,देबे भारी दाम
रे भाई समे बड़ा बलवान
गोभी बंधी सेमी भाटा, ये ठंडा मा आथे।
भारी मँहगा लाल टमाटर,धारे धार बोहाथे।
काला कब कब खाना हावय,समे जरा पहिचान।
रे भाई समे बड़ा बलवान
गरमी राखे सुकसी खाले,खाले जीमी कांदा।
रखिया मखना बरी बनाले,नोहय संगी फांदा।
आमा लाल कलिंदर खाले,इही बचाथे जान।
रे भाई समे बड़ा बलवान
बरसा मा पटवा भाजी अउ,रमकलिया हे बारी।
बरबट्टी खीरा अउ कुंदरू,मिले करेला भारी।
डोंड़का फोकट मा मिल जाथे,बात कहँव सच मान।
रे भाई समे बड़ा बलवान
मँहगाई के रो झन रोना,जइसे हाबय खाले।
बे मौसम के सब्जी भाजी,खा के मजा उडाले।
समे परे रसता म फ़ेंकाथे, जइसे मरे समान।
रे भाई समे बड़ा बलवान।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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