Saturday, 31 August 2019

सखी छंद

सखी छंद
जय होवय अब तीजा के।

तीजा के दिन हर आगे।
जीजा के मनवा जागे।
एस करे तइसे लागे।
जाने कोन डहर भागे।

दीदी ला सँग लाये हौं।
पर कुछ भाँपत आये हौं।
मन मा बात दबाये हौं।
नइ मँय बात उठाये हौं।

करे बहाना ओ जाही।
दारू मुर्गा ओ लाही।
संगी साथी मन आही।
अबड़ मजा जीजा पाही।

दीदी ला ओ डर्राथे।
आँखी देखे थर्राथे।
पीये बर बाहिर जाथे।
घर आये ले घबराथे।

अब तो रहे छहेल्ला हे।
घर तक पूरा हेल्ला हे।
पीयत रही ढकेल्ला हे।
छूटे गर के ठेल्ला हे।

रोज जमेटो ले आही।
आनी बानी के खाही। 
दीदी लाँघन रह जाही।
जीजा ओती मोटाही।

जय होवय अब तीजा के।
मरना नइ हे जीजा के।
दावत होही पीजा के।
घर जावत हँव जीजा के।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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