तीजा ले घर आये हे।
मुड़ मा सबो उठाये हे।
येती ओती धाये हे।
जे समान नइ पाये हे।
मजा उड़ाए हँव भारी।
अब चुप्पी के हे पारी।
चलत हवय ओखर आरी।
मोर शेरनी कस नारी।
अब तो गाय बनाही जी।
हाँव हाँव चिल्लाही जी।
जम्मो काम कराही जी।
निशदिन हुकुम चलाही जी।
जाने कब ओ दिन आही।
जे दिन ये मइके जाही।
तभे तराना मन गाही।
अंग अंग हर हरसाही।
हर महिना तीजा आवय।
भाई आके ले जावय।
तेन बात मोला भावय।
No comments:
Post a Comment