Sunday, 1 September 2019

हमर परिवार 2

दोहा-नाथू के लइका बड़े,रघुनन्दन हे नाम। 
    कतका बड़ परिवार हे, करत हवय का काम।1।
       
चौपाई
रघुनन्दन के होइस फेरा। जाने कोन समे का बेरा।
पर्रा मा दुलहन बइठारिन। धरे धरे भाँवर ला पारिन।

ओ लइका जल्दी बिसरागे। ऊपर वाला ला ओ भा गे।
फिर दूजा ले ब्याह रचाइन। सुकवारो ला घर ले आइन।

रघुनन्दन के किसमत जागे। देख नौकरी ओ हर पा गे।
बने ग्राम सेवक हे संगी। दूर करिन जे घर के तंगी।

रामायण सुग्घर ओ गाथे। बढ़िया पेटी तको बजाथे।
बीमारी तक दूर भगाथे। दवा पाय बर जे मन आथे।

रघुनन्दन देखव हरसागे। जब खुशहाली घर मा आगे।
चार पुत्र मारय किलकारी। आइन जग मा बारी बारी।

बड़का नाम नरेंद्र कहाइन। मँझला नाम विरेंदर पाइन।
अंतर मँझला रहे सुरेंदर। छोटे राम कुमारा सुंदर।

पालिन पोषिन सुख दे आगर। जइसे लहरा मारय सागर।
लइका मनके ब्याह रचाइन। चार बहुरिया घर मा लाइन।

दोहा-काम करत राहय जिहाँ,खेती डरिस सकेल।
    कोसमंदी ला छोंड़ के,बसगिन हवय भुकेल।2।

No comments:

Post a Comment