दोहा-रायसिंह के पुत्र दो,नाथू तातू नाम।
भारी विपदा झेल के,पाइन हवय मुकाम।1।
चौपाई
नाथू तातू लइका राहय। देखे जेमन तेमन काहय।
हैजा आइस हावय भारी। छागे जिनगी मा अँधियारी।
दाई ददा ह सँघरा मरगे। घर कुरिया हर सुन्ना परगे।
तातू दूध पिये बर रोवय। रोवत रोवत ही ओ सोवय।
कका बड़ा मन उन ला पालिन। कहिथे माल सबो ला खा लिन।
भर भर कोठी धान सिरागे। मटिया लेगे हे कस लागे।
नाम सोनिया नाथू जोही। मनभौतिन तातू के होही।
कर बिहाव घर वापस आइन। सुग्घर जिनगी ला उन पाइन।
नाथू तातू घर किलकारी। लइका आइस बारी बारी।
तीन पुत्र दू पुत्री पागे। नाथू देखव तो हरसागे।
रघुनन्दन रघुचन्द कहाइन। अउ रघुवीर सखा कस पाइन।
झुनिया पुनिया राहय बहिनी। तिखर मया के अउ का कहिनी।
खोरबाहरा खोरबाहरिन । छोटे रामकृपाल रहे गिन।।
तीनो लइका तातू पावय। किलकारी ले घर भर जावय।
दोहा-नाथू तातू संग मा,करिन अबड़ हे काम।
पढा लिखा लइका सबो,पाइन हवय आराम।2।
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