Thursday, 26 September 2019

सरसी छंद

सरसी छंद --चक्का

जीव जगत मा जब आइन हे, पाँव भरोसा ताय।
जइसन जइसन क्षमता राहय,तइसन दउड़ लगाय।

कखरो दूठन पाँव रहय ता,कखरो राहय चार।
कतको मन बिन पाँव चलत हे, कतको के भरमार।

पर जेमन के पाँख रहय ओ,अम्बर मा उड़ियाय।
दउड़इया सब जीव जगत ले,ओ आघू हो जाय।

मनखे हर अब सोंचे लागय,कइसे करँव उपाय।
जीव जगत के जम्मोझन ने,मनखे हर अघुवाय।

घोड़ा के फिर करे सवारी,सरपट दउड़ लगाय।
पर घोड़ा मा एक्के जावय,ज्यादा जा नइ पाय।

धीरे धीरे सोंचत सोंचत,पाइस एक उपाय।
लकड़ी ला फिर काट छाँट के,चक्का एक बनाय।

दू चक्का ले गाड़ी बनगे,बइठत हे दू चार।
बइला भइसा खींचन लागे,काम आय भरमार। 

सयकिल के निर्माण होय ले,सबके जागय भाग।
खड़बिड़ खड़बिड़ दउड़न लागय,छेड़ हवा सँग राग।

तीन तीन चक्का ला जोड़य, रिक्सा बने बनाय।
बइठारय दू चार सवारी,खींच तहाँ ले जाय।

धीरे से फिर ईंधन वाला,गाड़ी आइस जान।
मोटर सयकिल सरपट भागय, करय पूर्ण अरमान। 

बरसा जाड़ा घाम बचावय, अइसन करव उपाय।
चक्का फिर ओ चार लगा के,बस अउ कार बनाय।

जादा झन ला लेगे खातिर,फिर बनगे जी ट्रेन।
सरपट पटरी मा ओ दउड़य,चक्का के हे चेन।

मनखे सोंचे पाँख रहे ले,चिड़िया हर उड़ियाय।
अब उड़ियाये खातिर मनखे,सोचन लगे उपाय।

मनखे के मिहनत ले देखव,बनगे हवय जहाज।
आसमान मा ओ उड़ियावय,जेमा सबला नाज।

धरती अम्बर या हो सागर,सब मा चले जहाज।
लेगत हे राकेट इहाँ ले,चन्द्रयान ला आज।

चक्का के निर्माण होय ले,मनखे जीतय जंग।
सबले आगू भागत हावय,दुनिया देखय दंग।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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