Sunday, 1 September 2019

हमर परिवार 3

दोहा-कथा कहँव रघुचन्द के,जिकर किसानी काम।
     माटी के सेवा करय,नइ पावय आराम।1।

चौपाई
जादा ओ पढ़ लिख नइ पाइन। खेती मा फिर हाथ बटाइन।
ब्याह रचाइन ओ फेकन ले। घर भर डारिन ओ अन धन ले।

मिहनत कस मजबूत किसनहा। भर्री भाँठा करदिस धनहा।
खेत खार मा जाँगर पेरय। बन कचरा ला दिनभर हेरय।

दुख रघुचन्द तको बिसरागे। छः छः लइका जब घर आगे।
आँगन मा किलकारी छा गे। देख खुशी बाँही छतरागे।

नाम बीरबल हावय बड़का। अउ रमेश हे दूसर लड़का।
तीसर नाम महेश धराये। तब धनेश छन्नू हर आये।

कुंती नाम बहिन इक राहय। दया मया मा सबझन चाहय।
बाल पने मा सरग सिधारे। दवा दुआ सब्बो जब हारे।

लइका मन ला खूब पढ़ाइन। पाँव खड़ा होना सिखलाइन।
हँसी खुशी ले ब्याह रचाइन। पाँच बहुरिया घर मा लाइन।

भरे भरे घर अँगना हावय। जइसन चाहिन तइसन पावय।
सीधा सादा हे जिनगानी। सुग्घर ओखर हवय कहानी।

दोहा-अबतक ओ मिहनत करे,हाड़ा हे मजबूत।
      टँग टँग रेंगत देख के,भाग जथे यमदूत।2।

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