Thursday, 26 September 2019

घनाक्षरी

घनाक्षरी

देख ताक चलो भाई,हो ना जाये करलाई,
सड़क के बीच बीच,यमराज वास हे।
खाय के अघाये हावे,बैठ पगुराय हावे,
गरुवा ह आये हावे,रोड आये रास हे।
कोनो येला लेगे नही,छोड़े हावे लाय कहीं,
घूम घूम खाये देखौ,खेत खार नास हे।
भर्री भाँठा हा छेकागे,सब गरुवा बंधागे,
घर ले निकाल देखो,खेदे आस पास हे।1।

छोटे गाड़ी टकराथे, गाड़ी वाला गिर जाथे,
हाथ पाँव टूट जाथे, मुड़ फूट जाय जी।  
झन रफतार जाहू,गरुवा सड़क पाहू,
हारन बजाहू भले,घुँच नइ पाय जी।
कार बस टकराथे, जान गरुवा के जाथे,
कभू कभू बस कार, नरवा धँसाय जी।
जान ल बचाय बर, चलहू सम्हल कर,
हेलमेट पहिरे ओ, हुसियार ताय जी।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार 24-9-19

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