Sunday, 17 January 2021

गजल

गजल-दिलीप कुमार वर्मा

बहरे हजज़ मुसमन अख़रब मक्फ़ूफ मक्फ़ूफ मक्फ़ूफ महज़ूफ़
मफ़ऊल मुफ़ाईल मुफ़ाईल फ़ऊलुन

221 1221 1221 122

रावण ह बने ज्ञान के भंडार रहिस हे। 
अउ कुम्भकरण भाई ह खूंखार रहिस हे। 

पर एक विभीषण रहे भाई म जे छोटे। 
दोनो ल मरादिस बड़ा हुसियार रहिस हे। 

सीता बिना बनवास मा रावण मरे कइसे।
सीता के हरण मारे के आधार रहिस हे। 

लछिमन चले हे संग म का काम बता दे। 
रावण के टुरा मेघ के हथियार रहिस हे।

हनुमान बिना काम कहाँ हो भला पूरा। 
भगवान वो शिव शक्ति के अवतार रहिस हे। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार

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