Wednesday, 8 January 2020

मुक्तक

मुक्तक - दिलीप कुमार वर्मा

चला के बाण वो पूछे, लगा क्या तीर शीने में। 
उसे कैसे बताऊँ मैं, उठा क्यों पीर शीने में। 
नजर से जो किया उसने, नही वो तीर कर सकता। 
कलेजा चीर के रख दी, गड़ा समसीर शीने में।  

उसे मैं प्यार करता हूँ,मगर मैं कह नही सकता। 
उसे देखे कहीं कोई, जरा भी सह नही सकता।  
बताओ क्या करूँ दिल का, समझता है नही कुछ भी। 
उसे देखे बिना पल भर,नही मैं रह नही सकता।   

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 

बलौदाबाजार



No comments:

Post a Comment