Wednesday, 8 January 2020

मुक्तक

मुक्तक 

1222     1222 1222      1222

गगन भेदी रखे हथियार हैं पर हम नही लड़ते। 
अगर हो सामने दुश्मन,तमाचा हम नही जड़ते। 
लड़ाई से समस्या हल कभी भी हो  नही सकता। 
किसी के भी फ़टे में टाँग देने हम नही पड़ते।  

रहे कोई अगर आगे, कभी भी टाँग मत खींचो। 
चलो बनके उसी के संग, ऐसा जल जरा सींचो। 
कमाई को सभी खाते यहाँ अपने पसीने की। 
पिछड़ जाओ कभी जो तुम,निगाहें यूँ नही भींचो। 

पसीना जो बहाता है,वही तो काम आता है। 
दलाली जो करे धन का,सदा वो डूब जाता है। 
कमाई में कभी भी झूठ का पौधा नही फलता। 
पसीना रंग लाता है, वही तो फल पकाता है। 

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार 3-1-2020

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