Friday, 17 January 2020

पंच चामर छंद

छंद- पंचचामर 

 षोडषाक्षरावृत्ति

12 12 12 12     12 12 12 12 

चुनाव के महौल मा, सबो रँगाय रंग हे। 
पिये हवै शराब ला, मताय देख जंग हे। 
जगा जगा खड़े खड़े, लड़े लड़ाय बाट मा। 
बिगाड़ के रखे हवै, महौल गाँव घाट मा। 

सगा सगा चिन्हे नही, कका बबा भुलाय हे। 
पिलाय के शराब ला, जगा जगा लड़ाय हे। 
कहे दिलीप जान लौ, बताय साँच मान लौ। 
शराब हा बिगाड़थे, त छोड़ आज ठान लौ।  

चुनाव ला कराय बर, सचेत हो रहव सभी।  
बिना पिए शराब वोट दान गा करव तभी। 
तभे बने चुनाय जी, सही सही ह आय जी। 
बनाय गाँव ला बने, खुसी जहाँ म छाय जी। 

हरेक पर्व मा चले, बहाय रोज धार जी। 
शराब के बिना कहाँ, ग होय जीत हार जी। 
मनाय बर हवय खुसी, शराब ला उड़ेल दे। 
अगर हवच उदास ता, दु चार पाव पेल दे। 

इही चले सबो जगा, कहाँ कनो ह मानथे। 
करे खराब देह ला, सबो ह बात जानथे। 
तभो कहे पिलाव जी, खुसी सबो मनाव जी।
शराब दूर फेंकथे, शरीर के तनाव जी।

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार

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