Monday, 12 April 2021

चौपाई

चौपाई दोहा- छेड़छाड़ करना नही,पहले सुनलो बात। पछतावोगे रात दिन,कहीं करे आघात। मुझे मार कर मरजाओगे। या बोलो तुम घर जाओगे। देख सभी को डर जाओगे। घूटन से तुम सड़ जाओगे। मन के अंदर चोर रहेगा। अंतर मन में शोर रहेगा। हरपल तुझको बात कहेगा। कैसे अंतस भला सहेगा। अपराधी ही कहलाओगे। तुम जिस ओर कभी जाओगे। करनी करके पछताओगे। सोंच भला तुम क्या पाओगे। पाप कभी ना छुप पाता है। इक दिन घाव उभर आता है। उसदिन थू थू लोग करेंगे। घरवाले बेमौत मरेंगे। काल कोठरी में जाओगे। बोलो कुछ क्या तुम पाओगे। या फाँसी का हार मिलेगा। ये जीवन बेजार मिलेगा। गलती से गलती मत करना। मुश्किल होता सदा उबरना। गाँठ बांध बातों को धरना। वरना पड़जायेगा मरना। मुझको अपने घर जाने दो। जीवन में कुछ कर जाने दो। नही किसी को हाल कहूँगी। जैसे सब दिन रही रहूँगी। दिलीप कुमार वर्मा बलौदाबाजार

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