गजल
221 2122 221 2122
गुरुदेव के जनम दिन,चल आज सब मनाबो।
उँखरे सिखाय गाना,स्वागत उँखर म गाबो।
दुनिया हरे मरुस्थल,प्यास हवन हमू जी।
मिलगे कुँआ हमू ला,चल प्यास हम बुझाबो।
भटके हवन डगर ले,रसता सुझाय हावय।
गुरुदेव के कृपा ले,सब छंद सीख जाबो।
गुरुदेव के असन जी,मिलथे कहाँ जहाँ मा।
निःस्वार्थ भाव ले जे,बाँटे हमू ह पाबो।
अपने पिता दलित के,बाना हवय उठाये।
गुरुदेव के उदिम ला,सब सीख हम उठाबो।
सीखे हवन हमू जे,गुरुदेव के कृपा ले।
साधक नवा जे आही, उन ला हमू सिखाबो।
अहसान मानथन हम,गुरुदेव जे बनाये।
बइगा दिलीप जइसे,सब ला चला बनाबो।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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