Tuesday, 6 April 2021

बाल कविता 30

1
हाथी 

हाथी दादा आवत हे। 
जब्बर सूंड हलावत हे। 

रेंगत हावय धमरस धइया। 
दुरिहा सब हो जावव भइया।  

2
हाथी के गाड़ी 

हाथी गाड़ी एक मँगाइस। 
ओमा हथनी ला बइठाइस।  

अपन डरावल बन के बइठे। 
गाड़ी बपुरा रच रिच अइठे। 

घर घिर घर घिर करत चलत हे। 
धुँआ निकालत खूब जलत हे।  

मजा लुटे तक नइ वो पावय।
चारो चक्का फुस हो जावय।  

3
मेला 

मेला घूमे जाsहूँ। 
सरपट दौड़ लगाsहूँ। 
खई खजेना खाsहूँ।  
अब्बड़ धूम मचाsहूँ।  

4
जाँता अउ ढेंकी 

जाँता करथे घर-घर घर-घर। 
ढेंकी भुकुरुस भुकुरुस ताय। 
जाँता पीसय गहूँ चना ला। 
ढेंकी ले तो धान कुटाय। 

5
चाँटी 

खदबिद-खदबिद दउड़त रहिथे। 
जाने काय जरूरी काम। 
दिखे एकता एमा संगी। 
जेखर चाँटी हावय नाम। 

चाँटी चट करथे गुड़ शक्कर।  
तेल तको बर दउड़त आय। 
खई खजेना झामत रहिथे। 
मन्दरस खातिर जान गँवाय।  

6
पेंड़ आम के 

महूँ लगाहूँ पेंड़ आम के। 
सुने हवँव बड़ हवय काम के। 

सेवा करके बड़े बढ़ाहूँ। 
येला संगी अपन बनाहूँ। 

बड़े होय फिर फर लग जाही। 
मिट्ठू तक खाये बर आही। 

जब मन करही मँय चढ़ जाहूँ।  
बइठ मजे से आमा खाहूँ।

7
शेर 

शेर दहाड़त रहिथे अब्बड़। 
बब्बर शेर रहत हे जब्बर। 

शेर देख जम्मो थर्रावँय। 
कोनो आगू मा नइ आवँय। 

का हिरना का भालू हाथी। 
शेर रखय नइ कोनो साथी। 

जेला पावय मार गिरावय।
चीर फाड़ के चट कर जावय। 

8
घुघवा 

रात होय ले घुघवा आवय। 
पकड़-पकड़ मुसुवा ला खावय।  

आके बइठय रात अटारी। 
घूमत राहय बरछा बारी। 

उदुक-उदुक अब्बड़ नरियावय। 
जेन सुने ते हर डर्रावय। 

देख पाय नइ बिहना बेरा। 
खोर्रा मा फिर करे बसेरा। 

9
चिखला 

गाँव गली चिखला भरमार। 
चिखला ले हे खेती खार।  

लइका दउड़त बाहिर जाय।
लथपथ चिखला रहे सनाय।    

सम्हल-सम्हल के पाँव चलाव। 
बिछल जवय झन देख बचाव।

जल्दी बाजी जेखर काम। 
फदफिद फद फिर गिरे धड़ाम।

10
मुसुवा 

कस रे मुसुवा तही बता दे।  
झटकुन कहाँ लुकाथस। 
राँपा कुदरी कहाँ रखे तँय।
कइसे बिला बनाथस। 

कुटुर-कुटुर रतिहा भर बाजय। 
का तँय भला चबाथस। 
कोरा माटी रोज निकाले। 
बता कहाँ ले लाथस। 

तोर बिला हर हे सुरंग कस। 
भूल भुलइया लागे। 
तभे पार कोनो नइ पावय।  
कोन डहर तँय भागे। 

11
चिरई 

चिंव-चिंव चिंव-चिंव करे चिरइया। 
रोज बिहानी आके।  

सुते रहँव मँय रोज जगावय।
मोला गीत सुनाके। 

दिन भर दाना पानी खातिर। 
दूर-दूर उड़ियावय। 

पकड़-पकड़ के किरा मकोरा। 
लइका खातिर लावय। 

संझा बेरा घर मा आवय।  
मोरो मन बहलावय।

चिंव-चिंव चिंव-चिंव करे चिरइया। 
लोरी सुघर सुनावय।

12
मोर बबा के तर्रा मेंछा

मोर बबा के पँर्री मेंछा। 
हावय तर्रा-तर्रा। 
देखत जिवरा हर घबराथे। 
 बबा अबड़ हे खर्रा। 

होत बिहानी भर-भर रोटी। 
दबा-दबा के खाथे। 
देर कहूँ हो जय खाना मा। 
फिर भारी चिल्लाथे। 

धरे गोटानी गली निकल जय। 
देख सबो घबराथें। 
तर्रा मेंछा आगे कहिके। 
झटपट सबो लुकाथें। 

ताव मार मेंछा मा रेंगय। 
भले रहय जी पँर्रा। 
मोर बबा के तर्रा मेंछा। 
हवय बबा कस खर्रा। 

13
करोना 

दाई दाई आज बता तँय। 
होथे काय करोना। 
गाँव गली सब सुन्ना होगे। 
पर गे रोना धोना। 

बंद परे इसकुल सब हावँय। 
बने हवन घर खुसरा। 
संगी साथी के बिन दाई। 
हो गे हन खस भुसरा। 

कइसन येखर रूप बता तँय। 
कोन डहर ले आथे। 
का चाकू हथियार धरे हे। 
जेमा मार गिराथे। 

एक बार मोला मिल जावय। 
तब मँय मजा चखाहूँ। 
कान पकड़ कुटकुट ले छर के। 
ओखर नाँव मिटाहूँ।

14
ददा 

मोर ददा हे सब ले बढ़िया। 
जइसे कहिथौं करथे। 
आनी बानी खेल खिलौना। 
ला के झोली भरथे। 

पीठ चढ़ा के घोड़ा जइसे। 
सरपट दौंड लगाथे। 
किसिम-किसिम के खई खजेना। 
रोज मोर बर लाथे।  

कभू रिसाथौं अबड़ मनाथे। 
रो-रो आँसू झरथे। 
कभू कहूँ गुस्सा हो जाथौं। 
ददा तहाँ बड़ डरथे। 

15
फक्कड़ राम 

बबलू भइया फक्कड़ राम। 
करय नही एक्को जी काम। 

खाये खातिर अघुआ ताय। 
चिक्कन चिक्कन चाँटत खाय। 

अबड़ लपरहा हावय जान। 
पाक जही सुन तोरो कान। 

जेखर जाँगर सरहा होय। 
झूठ बोल अपने मुँह धोय। 

येती वोती के सब बात।
चुगली करत रहे दिन रात। 

घर समाज बर बोझा ताय। 
अइसन मन ले राम बचाय। 

16
सरकस 

भालू ढोल बजावत हे। 
बंदर नाच दिखावत हे। 

हाथी खेलत हे फुटबॉल। 
शेर दहाड़त खुसरे जाल। 

साइकल कुकुर चलावत हे ।
मिट्ठू गीत सुनावत हे।   

नोनी बाबू आवत हे। 
जोकर खूब हँसावत हे। 

17
बादर  

बादर भइया जल्दी आजा। 
पानी के बरसा बरसा जा। 

गरमी अब्बड़ बाढ़े हावय।  
धरती ला पूरा झुलसावय। 

पेंड़ तको ले पाना झर गे।  
जीव तड़फ के कतको मर गे। 

सुक्खा होगे नदिया तरिया। 
सुग्घर धरती होगे परिया। 

रसता तोरे देखत हावन। 
कइसे के हम जान बचावन। 

मर जाबो जे तँय नइ आबे। 
अभी बता कब तँय बरसाबे। 

18
भालू 

होटल पहुँचे भालू भइया। 
नाच दिखावय ताता थइया। 

माँग समोसा गप-गप खावय। 
डोसा भजिया चट कर जावय। 

मीठा देखत मन ललचा गे। 
भालू के मुँह पानी आगे। 

नाचन लागे छम्मक-छम्मक। 
ढोल बजावय ढम्मक-ढम्मक। 

रस्स मलाई बरफी खाहूँ। 
तब्भे दुसर गली मँय जाहूँ।   

अब तो भालू जिद मा आगे। 
सेठ मलाई देवन लागे। 

19
गुरुजी 

गुरुजी बन के हाथी सब ला। 
देवत राहय सीख। 
मिहनत करके खाना चाही। 
कभू न माँगव भीख। 

बंदर कहिथे साँच कहत हव।
भीख माँगना खीक। 
पेट भरे के मजबूरी ता। 
चोरी करना ठीक। 

हाथी फिर फटकारत कहिथे। 
चोरी करना पाप। 
धीरे-धीरे सबो बताहूँ। 
बइठ अभी चुप चाप। 

20
आमा  

आमा देखे मन ललचा गे।  
कइसे येला पावँव।
कोन उदिम करके आमा ला।   
झटपट अभी गिरावँव।

संग बेंदरा करँव मितानी। 
या खुद से चढ़ जावँव।
बइठ कन्हैया जइसे रुख मा। 
आम मजा ले खावँव।

कहूँ बेंदरा सब खा देही। 
फेंक दिही बस गोही।
येखर ले पथरा दे मारँव। 
काम बने सब होही।

21
कलम 

मोर कलम हे जादूगर। 
जइसे येला लेथौं धर। 

चलत रथे ये हा फर-फर।  
जइसे हवा चले सर-सर।  

कोरा कागज झट भर दय। 
काम बड़े ये हर कर दय। 

जब ले येला पाये हँव। 
हरदम अउवल आये हँव।

22
कागज के नाव 

कागज के इक नाव बनाहूँ। 
नदिया मा वोला तउराहूँ। 

बइठ तहाँ घूमे बर जाहूँ। 
दुनिया घूम मजा मँय पाहूँ। 

संग ददा दाई हर जाही। 
मोला सरवन जइसे भाही। 

नाव चले फिर छप्पक-छइया। 
हम सब कहिबो हइया-हइया।

23
मदारी 

गाँव मदारी आय हे। 
डम-डम ढोल बजाय हे।  

नाचत हावय बेंदरा। 
पहिरे चिरहा चेंदरा। 

भालू खेल दिखात हे।  
थोरिक नइ सरमात हे। 

सब के मन हरसात हे
ताली खूब बजात हे

24
कहूँ पाँख मोरो होतिस 

कहूँ पाँख मोरो होतिस ता। 
ऊपर मा उड़ियातेंव। 
बरसा के दिन जइसे आतिस। 
बादर के घर जातेंव। 

बात-बात मा सब बादर ला। 
संगी अपन बनातेंव। 
बादर के सँग घूम घाम के। 
मँय अपनो घर आतेंव। 

जइसे गरमी के दिन आतिस। 
संगी अपन बलातेंव। 
जिहाँ-जिहाँ सूखा रहितिस ता।
बादर उहाँ घुमातेंव।

25
चाँद सुरुज के झगड़ा 

सुरुज कका आगी कस गोला। 
दिनभर आगी दागय। 
चंदा मामा ठंडा-ठंडा। 
देख सुरुज ला भागय। 

धरती दाई बीच पिसागे। 
चाँद सुरुज के झगड़ा। 
एक संग दुन्नो नइ आवँय। 
गजब हवय जी लफड़ा। 

धरती दाई बीच आय ता। 
चंदा देख रिसावय। 
चंदा दूर करे बर चाहय। 
सुरुज कका नइ भावय। 

मोला दुन्नो करा मया हे। 
का मँय हाल बतावँव। 
आरी पारी देखत रहीथौं। 
संग खेल नइ पावँव। 

26
चंदा लाने पहुँचे हाथी

हाथी पाँख लगाये उड़ गे। 
पहुँचे चंदा पास। 
सूंड़ लपेट धरे हे जम के। 
काम बहुत हे खास।

गोल चाँद हथनी ला भावय।  
हाथी जब हो पास।
चंदा के हँसिया कस दिखना। 
नइ आइस हे रास। 

तभे चाँद लाने बर पहुँचे। 
हाथी अपनो संग। 
जंगल मा मंगल हो जाही। 
अजब जमाही रंग। 

27
झुन्ना झूले बेंदरा 

झुन्ना झूलत रहे बेंदरा। 
ठाँगा पुछी लपेट। 
हवा चलिस जब जोरदार तब। 
ले लिस अपन चपेट। 

टूट परिस ठाँगा हकरस ले। 
आय बेंदरा संग। 
धरती मा गिरगे भकरस ले। 
बंदर होय अपंग। 

जादा मस्ती ठीक नही हे। 
इही सँदेसा देत।
उछल कूद भारी पर जाथे। 
अब तो जावव चेत। 

28
मुसुवा राजा 

मेंछा ताने मुसुवा राजा। 
जंग लड़े बर आगे। 
देख बिलइया आगू ठाढ़े। 
पुछी टाँग फिर भागे।  

सोंचे राहय होही कोनो। 
मुसुवा अलवा जलवा। 
उठा-उठा के पटक दुहूँ फिर। 
खाये मिलही हलवा। 

पाछू पर गे रहय बिलइया। 
सरपट दउड़ लगावय। 
बपुरा मुसुवा बिला खुसर के। 
अपनो जान बचावय। 

29
मुसुवा के सपना 

मुसुवा लानिस ढोलकी। 
दे-दे ताल बजाय। 
येती वोती कूद के। 
सब ला नाच दिखाय। 

हीरो बनहूँ सोंच के। 
निशदिन जोर लगाय। 
बजा-बजा के ढोलकी। 
दिन भर नाचत जाय। 

परे चमेटा जोर से। 
गये ढोलकी फूट। 
बंद करे फिर कूदना।  
सपना गय सब टूट।

30
पेंड़ कभू गुस्सा होतिस 

पेंड़ कभू गुस्सा होतिस ता। 
करतिस गजब कमाल। 
पेंड़ कटइया मन ला थपरा 
दे के करतिस लाल। 

रकसा जइसन हाथ लमा के। 
देतिस धर के खींच। 
पटक-पटक के जीव छड़ातिस  
कहितिस मरजा नींच। 

पाँव बढ़ा के टाँग फसातिस। 
देतिस तुरते चीर। 
मोर दरद ला तँय नइ जाने। 
तोर सुनव नइ पीर। 

कभू-कभू गुस्सा होये ले। 
बन जाथे सब काम। 
सिधवा मन ला काट-काट के। 
करथें लोग तमाम। 

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment