Sunday, 24 May 2020

सखि छंद

सखि छंद-दिलीप कुमार वर्मा

शासन के कहना मानौ। बात कहत हे सच जानव। 
नोहय तनिक लबारी जी। विपदा आये भारी जी। 

आये हावय कोरोना। पर जाही सब ला रोना। 
येखर कहाँ दवाई हे। बाँचव तभे भलाई हे। 

सुरसा कस बाढ़त हावय। रकसा जस ठाढ़त हावय। 
लील डरे हे कतको ला। काय बचाही ओ तोला। 

छूये तक मा आ जाथे। तीर तार जेला पाथे। 
भीड़ भाड़ के राजा ये। खूब बजावत बाजा ये।  

मरे नही ये मारे ले। बनय नही पर हारे ले।  
येला दूर भगाना हे। पीछा जल्द छुड़ाना हे। 

कुछ तो अब करना परही। तभे हमर ले ये डरही। 
नइ ते घर घर मा आही। उठा उठा सब ले जाही। 

पहिली कोरोना जानव। डॉक्टर का कहिथे मानव। 
कइसे फिर अपनाना हे। सब ला जान बचाना हे। 

रोगी ले दुरिहा रहना। डॉक्टर के हावय कहना। 
कोनो ला नइ छूना हे। खतरा येमा दूना हे। 

नाक मूँह ले ये आथे। स्वांस नली मा घर पाथे। 
साबुन बने लगाना हे। हाथ साफ कर जाना हे। 

मीटर भर दुरिहा राहव। घर ले बाहिर जब जाहव। 
मास्क लगा के जाना हे। सब ला जान बचाना हे। 

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

 



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