Sunday, 24 May 2020

रूपमाला छंद

रूपमाला 

मोर हिरदे मा खुसर गे तोर जब ले रूप। 
ठाढ़ बेरा मा तको मोला लगे नइ धूप। 
जाड़ मोला नइ जनावय पूस के ओ रात। 
आज कल मोला सुहावत हे घटा बरसात। 

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment