Thursday, 20 May 2021

मैं खुद स्वयं

मैं खुद स्वयं 

दुनिया को टोपी पहनाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ। 
झूठ बोल राजा बन आया, मैं खुद स्वयं बता दूँ। 

लूटा मैने माल खजाना, लूटी दुनिया सारी। 
चोरों का सरदार कहाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ।  

ठगना मेरा काम सदा है, कहता बातें सच्ची।
जो ना माने वही लुटाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ।  

राह चलत राही भटका दूँ, मंजिल पहुँच न पाये। 
कितनों को जहनुम पहुँचाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ।   

ठोंक ठाँक सब सीधा करता, जो मुझसे टकराये। 
अँकडू को झुकना सिखलाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ।

सूरत मेरी भोली भाली, सीरत ना पहचाने।
इसी बात का लाभ उठाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ।

फिर भी मेरी शान निराली, दुनिया मुझको पूजे। 
कोई मुझको जान न पाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ। 

खादी वर्दी वाला हीरो, कहते मुझको सेवक। 
अपनी सेवा खुद करवाया, मैं खुद स्वयं बता दूँ। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार


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