Thursday, 27 May 2021

गजल

गजल

2122  1122 1122  22

राम के नाम जपे ले सबो झन तर जाथें। 
मन तको शांत रहे राम के जे दर जाथें।  

जेन जन्मे नही अवतार ले जे हर भाई।
राम वो नाम जे हर काम हमर कर जाथें। 

माँ के दरबार सजे देख पहाड़ा वाली।
पूरा होथे रखे मन कामना जे हर जाथें।

आये सावन के महीना तहाँ शिव मंदिर मा।   
पाँव छाला परे तब ले धरे काँवर जाथें। 

नइ हे भगवान कहे ये सबो आडम्बर ये।
फेर घोंडत बता दरबार म काबर जाथें। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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