भोले बाबा
भोले बाबा तहीं बतादे,कइसे तोर दरस बर आवँ।
छाती लोटत साँप हवय ता,कइसे तोला जल ल चढ़ावँ।
लगे महीना सावन के हे,बून्द बून्द बर तरसे धान।
बाती जइसन सबो बरागे,माथा धर के रोय किसान।
अइसन भारी विपदा मा मँय,कइसे उखरा रेंगत जावँ।
छाती लोटत साँप हवय ता,कइसे तोला जल ल चढाँव।
बम भोले के ये जयकारा,मोर हलक तक अब नइ आय।
काँवर पानी धर के रेंगव,मोरो मन ला अब नइ भाय।
तोर चढ़े परसाद बता दे,कइसे के अब मँय हर खावँ।
छाती लोटत साँप हवय ता,कइसे तोला जल ल चढाँव।
मंदिर के घण्टा हर भोले,रहि रहि के मोला चिड़हाय।
तोपवँ कतको कान तभो ले,गूंज गूंज के भीतर आय।
देदे भोले अब परसादी, तोर दरस बिन रह नइ पावँ।
छाती लोटत साँप तभो ले,तोर दरस बर मँय हर आवँ।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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