ताटक छंद
सूरज सरजी छुट्टी में है,वर्षा मैडम आई है।
कोर्स हुआ कम्प्लीट मैम का,फिर भी क्लाश लगाई है।
कॉपी पूरा लिख डाले हैं,जगा यहाँ ना खाली है।
फिर भी नियमित मैम पढ़ाती,कैसे कहूँ दिवाली है।
रखे मार्जिन जो कॉपी थे,उसमें भी लिख डाले हैं।
बड़ी भूल कर बैठे हमतो,तभी पड़े ये लाले हैं।
सूरज सर की करें पतिक्षा,आके जान बचाएँगे।
वर्ना कॉपी में लिक्खा जो,सारे ओ मिट जाएँगे।
सूरज सर जी जल्दी आओ,अभी परीक्षा होना है।
रहा अगर परिणाम शून्य तो,बरस बरस भर रोना है।
वर्षा की जब पड़े जरूरत,सूरज सर जी आते थे।
वर्षा मैडम कभी कभी आ,थोड़ा आश बँधाते थे।
अब सूरज का काम यहाँ है,तो वर्षा फिर आई है।
रखा समय का ध्यान नही औ, आके हमे सताई है।
हैड मेम दुर्गा आई पर,वर्षा मेंम कहाँ माने।
अपने ऑफिस बैठी दुर्गा,सुंदर सा छतरी ताने।
लगता है शाला खुलने का,समय बढ़ाया जाएगा।
तब ही वर्षा औ सूरज का,समय मेंच हो पाएगा।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
No comments:
Post a Comment