Wednesday, 2 October 2019

दोहा


तड़फय मछरी कस सबो, पानी बिना किसान।
कलप कलप रोवत हवय, देख भुंजावत धान।1।

अजर अमर ओ मन रहय, नेक करे जे काम।
दुख सुख के साथी बने, सेवक जेखर नाम।2।

पग पग मा काँटा मिले, सत मारग जे जाय।
बाधा टारत जे चले, अवतारी कहलाय।3।

दरपन कस सच्चा बनव, कहदव मुँह मा बात।
बिगड़े बात सँवार लय, झन पावय आघात।4।

कलम चला के देख लव, ये बड़का हथियार।
बन्दुक जे नइ कर सके, कलम करय सरकार।5।

हाथ लिखाये नइ रहय, करम करे ओ पाय।
बिना हाथ के मन तको, सरग अमर दिखलाय।6।

बटकी मा झन छोडबे, एक़्क़ो दाना भात।
मान करे नइ अन्न के, ते मन खाथे लात।7।

बिन मंजिल जे रेंगथे, भटक जथे ओ राह।
मिहनत के फल तब मिले, रख मन में जब चाह।8।

रचना - दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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