रोला छंद
कर ले पूजा पाठ, बचे नइ हे जिनगानी।
जाँगर सबो सिराय, सिरागे तोर जवानी।
ताका झाँकी छोड़, भक्ति के रसता धर ले।
अपनो सरग सँवार, ध्यान दे पूजा कर ले ।
बचपन बीते खेल, जवानी मा इतराये।
पइसा ला भगवान, समझ के खूब कमाये।
अब होगे लाचार, तभो नइ कहना माने।
मोर मोर सब मोर, कहे तँय नइ पहिचाने।
अब तो रसता देख, लिवाये कब ओ आही।
बिन पूछे ओ दूत, धरे तोला ले जाही।
रहि जाही सब चीज, संग काहीं नइ जावय।
जेन जपे श्री राम, धाम बस वो ही पावय।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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