Tuesday, 13 July 2021

दोहे

दोहे हिंदी

गौर वर्ण की सुंदरी,जिसके काले नैन। 
मेघ सरीखे जुल्फ हैं,कोयल जैसी बैन। 

चंदा जैसी छब लिए,मुख मीठी मुस्कान। 
रंग गुलाबी होठ है,ज्यूँ खाई हो पान। 

भौंहे तीर कमान सा,कजरा लगे कटार।
गाल गुलाबी फूल है,होठ लगे रसदार।  

ना ऊँची तूँ ऊंट सी,जिसके लम्बे पाँव।
छोटी पर ठिगनी नही,ज्यों बरगद के छाँव। 

काया हाथी सा नही,जिसके देंह विसाल। 
जिस तन पे गिर जाय तो,बन जाये ओ काल।  

तूँ पूरी परफेक्ट है,ज्यूँ घोड़ी के देंह। 
देख तुझे क्यों साँवरी,अंतस उठे स्नेह। 

अब तेरी बस चाह है,मृग नैनी सुन बैन। 
जो मेरी तूँ ना हुई,नहीं मिलेंगे चैन। 

मेरे घर में आ सखी,कर दे मुझे निहाल। 
रौशन कर घर आँगना, मेंट सभी जंजाल। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार

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