बादर आवत
बादर आवत हे करिया।भर जाही नदिया तरिया।
घड़घड़ गरजत आवत हे।बिजुरी तक चमकावत हे।
सरसर सरसर हवा चले।लोगन ला अब कहाँ छले।
जइसन रूप दिखावत हे।तइसे जल बरसावत हे।
गाँव तको हरसावत हे।बरसा के दिन आवत हे।
लोगन खुसी मनावत हे।गीत खुसी के गावत हे।
गरुवा पल्ला भागत हे।आय हरेली लागत हे।
साँप तको इतरावत हे ।येती ओती जावत हे।
घर घर नाँगर साजत हे।ठक ठक लकड़ी बाजत हे।
बइला भूँसा खावत हे।काम बहुत ओ आवत हे।
नाँगर ला पजवालव ना।डाँड़ी नवा बनालव ना।
पंचारी सजवालव जी।नहना नवा बना लव जी।
खाँध उठा के नाँगर ला।पेरे जावव जाँगर ला।
इही किसनहा के पढ़ना।भाग अपन हावय गढ़ना।
बइला सहपाठी बन के।सँग मा जावत हे तन के।
कोरा कागज खेत बने।नाँगर चलथे कलम सने।
ओरी ओरी जावत हे।सुग्घर देख लिखावत हे।
लिख लिख धान उगावत हे।मिहनत के फल पावत हे।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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