बरखा रानी
टूरा बिलवा। 5
मण्डरावत हावे। 7
तिरे तीर मा। 5
आँखी मारथे।
सबकुछ हारथे।
चिल्ला चिल्ला के।
मया लुटाये।
हमला बने रिझाये।
हवा चलाये।
बिलवा जोही।
मनभर भिगोही।
बिना गरजे।
मया अपार।
अमृत कस धार।
सबो हमागे।
भरगे कोरा।
दाई जइसे जोरा।
टुरी अघा गे।
आबे करिया।
भर जय तरिया।
खार सुहावै।
धनहा डोली।
हरियर रंगोली ।
हँसी ठिठोली।
बरखा रानी।
भेजव अब पानी।
झन हो देरी।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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