बैसाखी
बैसाखी धर के कभू,देश चलय नइ जान लव।
बिन बैसाखी के रहे,पल्ला दउड़य मान लव।
दुवा करव भगवान ले,बैसाखी झन आय जी।
लड़बिड़ लड़बिड़ होय ले,देश कहाँ बढ़ पाय जी।
पप्पू गप्पू जे बने,पर कंधा मजबूत हो।
मान बढावय देश के,बने बने करतूत हो।
बैसाखी के दाँव ले,देश तको थर्रा जथे।
अवसर वादी मन सदा,सबो मलाई खा जथे।
बैसाखी केशर बने,करलव इखर इलाज जी।
पाँव रहे मजबूत जे,पहिरा देवव ताज जी।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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