Wednesday, 12 January 2022

बाल गीत

बाल गीत- सुबह सवेरे 

सुबह सवेरे चिड़िया आई। 
मैं सोया था मुझे जगाई। 

बोली सुबह हुई उठ जाओ। 
देखो सूरज छत पर आओ। 

ठंडी हवा चली इठलाती। 
मध्यम-मध्यम गुनगुन गाती।

हरी-भरी है दुनिया सारी। 
घूम रहे हैं सब नर नारी। 

धुँआ-धुँआ-सा जग भर छाया। 
कैसी है ये प्रभु की माया। 

हर तिनके पर ओस पड़ी है। 
लगता है ज्यों हीर जड़ी है। 

पूर्व दिशा की देखो लाली। 
मंत्र मुग्ध है करने वाली।

ऐसा अवसर अब मत खोना। 
दिन चढ़ते तक कभी न सोना। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार

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