रचना- दिलीप कुमार वर्मा
भोले बाबा ला मनाये चला जाबो
काँवर धर पानी भर के।
सावन महीना लगे पावन महीना
अपनो भाग जगाबो जगाबो
भोले बाबा ला
भोले बाबा भोला भाला
ओ भोला भंडारी हे।
अवघट दानी दान करत है
अब तो हमरो बारी हे।
चल नहला फूल पान चढाबो
चरनन माथ नवाबो नवाबो
भोले बाबा ला
बाबा के हे दूर नगरिया
पर झन तुम घबराहव जी।
हिम्मत करलव आस बंधा लव
तब तो दर्शन पाहव जी।
संगी साथी संग चलाचल
चल जयकार लगाबो लगाबो
भोले बाबा ला
पाँव पड़े छाला मत देखव
बस भोले के ध्यान धरव।
सुख दुख देने वाला भोले
बस भोले के नाम जपव।
अंतर यामी सब जानत हे
का दुख हम ह बताबो बताबो
भोले बाबा ला।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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