Thursday, 18 June 2020

लावणी छंद

लावणी छंद- दिलीप कुमार वर्मा 

राहु केतु बन पाक चीन हर, हमला बड़ डरव्हावत हे। 
भारत माँ ला लीले खातिर, चुपके चुपके आवत हे। 

पाक ग्रसे कश्मीर तरफ ला, मार ठहाका हाँसत हे। 
चीन ग्रसे लद्दाख डहर ला, भलुवा जइसन नाचत हे। 

धीरे धीरे देश लीलही, तइसन येमन लागत हे। 
हमर देश के मुखिया मन हर, काबर नइ तो जागत हे। 

डटे सिपाही सीमा राखे, अपनो जान गँवावत हे। 
बिना मिले आदेश बिचारा, काँही कर नइ पावत हे। 

एक बार आदेश मिलय ता, चटनी असन बना देही। 
बठवा चीनी चाँटत रइही, पापी पाक पना लेही। 

धरती पानी अउ अगास ले, बरसा बम गोला करही। 
बैरी मन ला पटक पटक के, कपड़ा सहीं निचो डरही। 

चीरत फाड़त रार मचावत, जब सेना आगू जाही। 
चीनी पाकी थरथर काँपत, कहाँ बतर भागे पाही। 

हमर देश के आन बान ला, बैरी मन ललकारे हे। 
अब तो जागव हिंदुस्तानी, बीस सिपाही मारे हे। 

दम खम जब दिखलाना हे तब, कफ़न बांध के काम करव। 
बीस सिपाही वो मन मारे, बीस लाख तुम मार डरव। 

हमर देश के पावन माटी, बैरी मन झन पाँव धरय। 
अइसन सबक सिखावव वोला,  दुस्साहस झन कभू करय। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment