दुर्मिल सवैया
112×8
करिया बदरा घिर आवत हे लगथे बरसा घनघोर करे।
गरजे घुमड़े बिजुरी चमके कड़कावत ओ बड़ शोर करे।
नरियावत हे झिंगुरा मिचका बड़ शोर मचावत बोर करे।
पर देख भयानक रूप घटा दुबके रहिजौं मन मोर करे।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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