Tuesday, 30 June 2020

दुर्मिल सवैया

दुर्मिल सवैया 

112×8

करिया बदरा घिर आवत हे लगथे बरसा घनघोर करे। 

गरजे घुमड़े बिजुरी चमके कड़कावत ओ बड़ शोर करे।

नरियावत हे झिंगुरा मिचका बड़ शोर मचावत बोर करे।

पर देख भयानक रूप घटा दुबके रहिजौं मन मोर करे। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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