Tuesday, 30 June 2020

विधाता छंद

जवानी

1222 1222 1222 1222

जवानी के कहानी मा , बुढापा टाँग मारत हे। 
न जाने कोन जीतत हे, न जाने कोन हारत हे। 
लड़कपन के कहानी ला, जवानी मार खाये हे। 
जवानी हार मत जावय, बुढापा तीर आये हे। 

चढ़ा के बाल मा रंगत, सजाये रूप ला भारी। 
जवानी छोड़ मत जावय, करत हे आज तइयारी। 
समे रोके कहाँ रुकथे, उदिम कतको करव भाई। 
ढहे घर जे रहे जुन्ना, मचे फिर खूब करलाई। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा  
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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