Saturday, 27 June 2020

सावन गीत

रचना- दिलीप कुमार वर्मा

भोले जी के डमरू बाजे हैं डमा डम
चले हैं काँवरिया नाचे हैं छमा छम
अकड़ बम अकड़ बम 
अकड़ बम-बम बम-बम बम

नदिया के पानी धरे हे काँवर मा
भोले बाबा ल मनाये चले हैं सावन मा
पाँवे हे उखरा परत हे छाला रे
गेरुवा के बाना नरी में माला रे।
लइका अउ बुढ़वा कहाँ इहाँ हे कम
उही हर जाथे जेखर म हावय दम।
अकड़ बम अकड़ बम
अकड़ बमबम बमबम बम

सावन महीना मंदिर म मेला रे
भींड़ भगत के बाढ़े ठेली के ठेला रे।
सबो धरे हावय लोटा म पानी रे
फूल बेल पतिया हावय चढ़ानी रे।
बाजत हावय घण्टा कोई धरे न दम
बोले जयकारा बोले हैं बम बम
अकड़ बम अकड़ बम
अकड़ बमबम बमबम बम

भोले जी के डमरू बाजे हैं डमा डम

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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