विधाता छंद
1222 1222 1222 1222
कभू तँय मोर आँगन मा, बरस जा रे घटा कारी।
परे सुक्खा हवय कब ले, हमर घर खेत अउ बारी।
फसल के आस मा बइठे, करे तइयार हँव खेती।
मरत हे भूँख मुसुवा हा, निहारे आ तनिक येती।
झुलस गे पेंड़ पौधा मन, सुरुज के ताप अइसे हे।
भुला गे लोग मन जम्मो, घटा के रंग कइसे हे।
दिखा दे रूप ला तँय हा, बता दे काम का हावय।
बरस जा झूम के बादर, फसल सब सांस ले पावय।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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