Monday, 24 June 2019

योग

16/13 योग

योग करे बर सोंचत हावँव।पाछू तेरा साल ले।
आज तको मँय काहत हावँव।सुरु कर देहूँ काल ले।

पाँच बजे उठ नहा धोय के,महूँ लगाहूँ ध्यान जी।
हाथ गोड़ ला हिला डुला के,करँव योग सच मान जी।

आसन मा बइठे बइठे मँय,भर के लम्बा सांस ला।
छोड़त रइहूँ धीरे धीरे,नइ छोड़व मँय आस ला।

मँय अनुलोम विलोम ल करहूँ ,ध्यान सांस मा लाय के।
अउ कपाल भारती ल करहूँ,,बड़का पेट घटाय के।

ताड़ासन तन लम्बा करहूँ,भ्रमर सुनाहूँ कान ला।
सुरुज नमन कर स्वस्थ रहँव मँय,अपन बचाहूँ जान ला। 

रोज बिहानी सोंचत रहिथौं,कब आही ये काल जी।
रसता जोहत जोहत लगथे,यहू निकलही साल जी।

रसता देखत काल आय के,झन आ जावय काल जी।
तेकर सेती आज करत हँव,टोरे बर जंजाल जी।

झन देखव काली के रसता,आज करव सब योग जी।
स्वस्थ रहे तन मगन रहे मन,सबझन रहव निरोग जी।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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