Monday, 10 June 2019

दोहा

दोहा

सबो फेसबुक फ्रेंड ला,करत हवँव जोहार।
भेजत हावँव नेवता,आहू नदिया पार।

करना हावय पारटी,मिल जाबो सब संग।
आनी बानी भोज के,सबो जमाबो रंग।

एक मंच सब ला मिले,हो बढ़िया संवाद।
मेल जोल होवय बने,खाना सबले बाद। 

का का खाना हे बता,मीनू लेवव खोज।
नानवेज की वेज जी,कइसन होही भोज। 

पालक संग पनीर की,खाबो बकरा भात।
पूड़ी खीर बनाँव की,बिरियानी के बात।

मदिरा चाहत हव कहूँ, लेबल बने बताव।
कतका कतका माँग हे, लिस्ट तुरत भिजवाव। 

चखना मा काला रखन,सोच बने बतलाव।
चिंगरी भुंजवा चल जही,या काजू के चाव।

कोन कोन आहू बता,कब होही ये काम।
कोन नदी के तीर मा, कब देबो अंजाम।

सबो फ्रेंड आही तभे,हो पाही ये काम।
नइ आही जे मन इहाँ,ओमन देही दाम। 

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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