कुंडलियाँ
शिक्षा देते हैं सभी,पर लेता ना कोय।
बैठे हैं अभिमान में,बाद रहे सब रोय।
बाद रहे सब रोय, समय चलता जो आगे।
पाने को फिर ज्ञान,वही सब दरदर भागे।
गए समय जो चूक,कौन अब देगा दीक्षा।
समय रहे अनमोल,मिले तो लेलो शिक्षा।
बच्चा या बूढा रहे,ज्ञान मिले अनमोल।
ज्ञानी को ना आंकिये,उम्र तराजू तोल।
उम्र तराजू तोल, पता ना कुछ पाओगे।
बूढा देगा ज्ञान,समझ गर तुम जाओगे।
कहना अब तो मान,ज्ञान होता है सच्चा।
जाके ज्ञान बटोर,बड़ा ज्ञानी है बच्चा।
आकर्षित होते सभी,रूप रंग को देख।
लक्ष्मी जब घर आय तो,गुण को जरा सरेख।
गुण को जरा सरेख,काम इनसे है बनता।
गर होगा कुछ दोष,तभी आँखे है तनता।
रूप रंग को देख,कभी ना होना हर्षित।
गर लक्ष्मी गुणवान,सभी होंगे आकर्षित।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
शिक्षा देते हैं सभी,पर लेता ना कोय।
बैठे हैं अभिमान में,बाद रहे सब रोय।
बाद रहे सब रोय, समय चलता जो आगे।
पाने को फिर ज्ञान,वही सब दरदर भागे।
गए समय जो चूक,कौन अब देगा दीक्षा।
समय रहे अनमोल,मिले तो लेलो शिक्षा।
बच्चा या बूढा रहे,ज्ञान मिले अनमोल।
ज्ञानी को ना आंकिये,उम्र तराजू तोल।
उम्र तराजू तोल, पता ना कुछ पाओगे।
बूढा देगा ज्ञान,समझ गर तुम जाओगे।
कहना अब तो मान,ज्ञान होता है सच्चा।
जाके ज्ञान बटोर,बड़ा ज्ञानी है बच्चा।
आकर्षित होते सभी,रूप रंग को देख।
लक्ष्मी जब घर आय तो,गुण को जरा सरेख।
गुण को जरा सरेख,काम इनसे है बनता।
गर होगा कुछ दोष,तभी आँखे है तनता।
रूप रंग को देख,कभी ना होना हर्षित।
गर लक्ष्मी गुणवान,सभी होंगे आकर्षित।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
No comments:
Post a Comment