Monday, 24 June 2019

मनहरण घनाक्षरी

छत्तीसगढ़िया व्यंजन

बरा या सोंहारी खाले,ठेठरी ल तें पचाले,
खुरमी ल खाले संगी,गाबे गुन गान जी।
चीला की खपुर्रा खाबे, पतला तवा के पाबे,
अंगाकर खाले संगी,चटनी म सान जी।
फरा मुठिया ला खाले,बोबरा बने बनाले ,
गुझिया बनाये हवे, झट देवों लान जी।
छत्तीसगढ़िया रोटी,तनिक न रहे खोटी,
मन भर खाबे बाबू,जाबे पहिचान जी।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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