Monday, 24 June 2019

दोहा

दोहा

मरनाशन में लेट कर,देख जगत का हाल।
कौन यहाँ अपना रहे,कौन चाहता काल।

बहुत दुखी तेरे लिए,करता रहे विलाप।
अंतस पट को झाँकिए, कितना मन मे ताप।

जिंदा रहने से अगर,मिलता है कुछ दाम।
ओ ज्यादा दुख में रहे,जिससे तुझको काम।

कर्जदार गर हो सखा,लेके साहूकार।
दुआ करे ओ रात दिन,आता रहे उधार।

पत्नी का लफड़ा रहे,सोचे ये मरजाय।
दूजा करूँ विवाह जो,काम बहुत ओ आय।

बेटा चाहे बाप का,अनुकम्पा मिलजाय।
बिन मिहनत की नौकरी,कामचोर को भाय।

बीमा का पैसा मिले,पूर्ण ख्वाब हो चंद। 
पत्नी चाहे काल क्यों,आज स्वांस हो बंद।

बाप हमेसा चाहता,ठीक रहे औलाद।
फले फुले घर आँगना,जाए मेरे बाद।

बेटी रोती रह गई,एक रखे अरमान।
सर से साया ना हटे,रहे सलामत जान।

बिलख बिलख माँ रो रही, हाथ रखे ओ भाल।
बेटा के बदले अभी,मुझको आये काल।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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