Saturday, 5 December 2020

बाल कविता

बाल कविता 

पंख अगर मेरे होते तो, अम्बर में उड़ जाता। 
यहाँ वहाँ बस उड़ते रहता, साँझ ढले घर आता। 

देश विदेश जहाँ तक धरती, देख सभी को आता। 
खड़े हिमालय की चोटी से, मैं आवाज लगाता। 

जंगल झाड़ी बाग बगीचे,पर्वत नदियाँ झरने।
उड़ते रहता देख मजे से, मन को लगते हरने। 

पूनम की जब रात रहे तो, चंदा तक उड़ जाता। 
शीतल ठंडी छाँव तले मैं, रात बिता कर आता। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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