जनउला
1
तोर जान वो अंतस धरथे।
सीटी मार इसारा करथे।
तुरत जाव नइ ते पछताहू।
कोन हरे जी नाम बताहू।
2
देख जगत वो हा दिखलाथे।
जेती जाबे तेती जाथे।
हवय नानकन पर हे गुनिया।
जेन करा हे ओखर दुनिया।
3
भिखमंगा राजा बन जाथे।
गुन ला येखर जे हर पाथे।
सुसू करत रेंगत ये रहिथे।
नाम बता येला का कहिथे।
4
मनखे जइसे बोलत रहिथे।
जइसे कहिबे तइसे कहिथे।
कैदी बन के करे गुजारा।
मिल जाथे घर आरा पारा।
1कुकर 2 आँखी 3 कलम 4 मिट्ठू
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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