Friday, 4 December 2020

बाल कविता


छाता

रंग बिरंगा रहिथे छाता। 
पानी घाम ल सहिथे छाता। 

घाम रहे तब तानव छाता। 
छइहाँ देथे जानव छाता।  

बरसा के राजा बन जाथे।  
मुड़ ऊपर जब ये तन जाथे। 

मगर हवा ला बैरी जानव। 
ले उड़ियाथे सच्ची मानव। 

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़


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