Friday, 11 December 2020

दोहे दुमदार

दुमदार दोहे 

1
देवी के दरबार मे,भीड़ हवय भरमार। 
रखहू बने सम्हाल के, बटुवा झन हो पार।  
अबड़ हे चोर उचक्का। 
पार कर देही पक्का।  

2
घर के बाई छोड़ के, बाहिर ला झन झाँक। 
सपड़ाबे जब तँय कका, कटा जही जी नाक। 
मारही डंडा भारी। 
बगरही जगभर चारी। 

3
कुकरा बासत उठ जथे, हो जाथे तइयार। 
बइला ला भूँसा खवा, जाय किसनहा खार। 
धरे नाँगर वो जाथे। 
खेत मा जाय कमाथे। 


बखरी मा फइले रहय, आनी बानी नार। 
परिया कर दिस बेंदरा, बारी बखरी खार। 
बेंदरा रार मचावय। 
साग तरकारी खावय। 


पिंजरा के मैना असन, तड़फत हँव दिन रात। 
कब आबे जोही बता, ले के तँय बारात। 
ददा रिस्ता खोजत हे। 
कहाँ जाने बोजत हे।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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