दुमदार दोहे
1
देवी के दरबार मे,भीड़ हवय भरमार।
रखहू बने सम्हाल के, बटुवा झन हो पार।
अबड़ हे चोर उचक्का।
पार कर देही पक्का।
2
घर के बाई छोड़ के, बाहिर ला झन झाँक।
सपड़ाबे जब तँय कका, कटा जही जी नाक।
मारही डंडा भारी।
बगरही जगभर चारी।
3
कुकरा बासत उठ जथे, हो जाथे तइयार।
बइला ला भूँसा खवा, जाय किसनहा खार।
धरे नाँगर वो जाथे।
खेत मा जाय कमाथे।
4
बखरी मा फइले रहय, आनी बानी नार।
परिया कर दिस बेंदरा, बारी बखरी खार।
बेंदरा रार मचावय।
साग तरकारी खावय।
5
पिंजरा के मैना असन, तड़फत हँव दिन रात।
कब आबे जोही बता, ले के तँय बारात।
ददा रिस्ता खोजत हे।
कहाँ जाने बोजत हे।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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