Friday, 11 December 2020

गजल

गजल- दिलीप कुमार वर्मा 

बहरे रमल मुरब्बा सालिम 
फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन 

2122   2122 

हे बता अभिमान का के। 
जान सच धरती म आ के।

मीठ होथे ये जहर हा। 
मान नइ ते देख खा के। 

स्वर्ग मा भगवान रहिथे।
मर तहाँ ले देख जा के।  

भूत बनथे जर मरे ते। 
देख ले तँय आजमा के।   

टोनही झूपत अभर गे।  
ढोंग करथे गीत गा के। 

भाग जाथे भूत बाधा।
देख डंडा मा ठठा के। 

स्वर्ग पाही जे मरे सुन।
झूल गे मोला हटा के।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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